Jaisalmer top 10 tourist Places : गोल्डन सिटी के नाम से मशहूर जैसलमेर हमारे देश का एक अद्भुत और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। जैसलमेर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण भी मशहूर है, पाकिस्तान से लगा होने और थार रेगिस्तान के बीचों बीच स्थित होने के कारण भी यह अन्य पर्यटन स्थलों से अलग है।
जैसलमेर राजा महाराजाओं की भूमि रही है, यहां पर कई महल, हवेलियां और प्राचीन मंदिर स्थित है जहां पर जाकर आप यहां की प्राचीन स्थापत्य कला और संस्कृति से अवगत हो सकत है, जैसलमेर का किला यहां आने वाले सैलानियों की पहली पसंद रहा है। जैसलमेर में कुछ अनोखी और भूतियां जगह भी है जहांपर लोग यहां के इतिहास और रहस्यमय को जानने के लिए जाते है। आज के इस लेख में हम जैसलमेर की 10 बेहतरीन और अनोखी जगहों (Jaisalmer top 10 tourist places) के बारे में विस्तार से जानेंगे
जैसलमेर का किला (Jaisalmer Fort)
जैसलमेर का किले का निर्माण रावल जैसल सिंह के द्वारा 1155 ईस्वी में बनवाया गया था। यह महल दुनिया के कुछ जीवित नामी महलों में शुमार है, मतलब इस किले में अभी तक लोग रह रहे है। इस महल की खास बात यह है की यह महल पीले बलुआ पत्थर से निर्मित है, जो आज तक जस का तस खड़ा है। जैसलमेर का किला राजस्थान का दूसरा सबसे पुराना किला है।

पीले पत्थर से बनने के कारण दिन में किला गहरे भूरे रंग में और शाम के समय शहद सुनहरे रंग में चमकता है, जिस कारण या किला सोने जैसा लगता है। इसीलिए इस किले को स्वर्ण दुर्ग या गोल्डन फोर्ट के नाम से जाना जाता है। देश विदेश के सैलानी यहां पर महल और इसके भीतर बनी हवेलियों को देखने के लिए आते है।
- महल खुलने का समय : सुबह 9 बजे
- महल बंद होने का समय : शाम 6 बजे
- प्रवेश शुल्क (भारतीय) : 50 रु. (अनुमानित)
- प्रवेश शुल्क (विदेशी) : 250 रु. (अनुमानित)
- जैसलमेर महल मो. नंबर : 2992 252 404
गड़ीसर झील (Gadisar Lake)
गड़ीसर झील जो की जैसलमेर किले से करीब 1.5KM दूर स्थित है, इसका निर्माण जैसलमेर किले के संस्थापक रावल जैसल सिंह द्वारा सन 1156 ईस्वी में करवाया गया था। इसके बाद 1367 ईस्वी में इस झील का पुनर्निर्माण गड़सी सिंह द्वारा करवाया गया था, जिस कारण इसे गड़सी झील भी कहां जाता है।

गड़ीसर झील जैसलमेर आने वाले सैलानियों को खूब पसंद आता है, यहां पर अधिकतर लोग कुछ शांति के पल बिताने के लिए आते है। गड़ीसर झील के आस पास कई मंदिर स्थित है, जो भी लोगो के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यदि आप सर्दियों में यहां पर घूमने आते है तो आपको झील के आस पास कई देशी, विदेशी पंछी देखने को मिल सकते है।
- प्रवेश शुल्क : नि:शुल्क
- घुमने का समय : दिन में कभी भी
- बोटिंग शुल्क : 100 रु. से 300 रु. (बोट के मुताबिक)
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सलीम सिंह की हवेली (Salim Singh Haveli)
सलीम सिंह की हवेली का निर्माण यहां के प्रधानमंत्री सलीम सिंह द्वारा 19वीं शताब्दी में करवाया गया था। इस हवेली का डिज़ाइन तत्कालीन समय के दो प्रसिद्ध वास्तुकार भाइयों द्वारा बनाया गया था, यह हवेली राजस्थानी और मुगल शैली का मिश्रण है, हवेली में कई कमरें, आंगन, बालकानियां मौजूद है।

सैलानी इस हवेली के वास्तुकला (डिजाइन) और स्थापत्य कला को देखने के लिए दूर दूर से आते है। इस हवेली की दीवारों और मोर व अन्य कलाकृतियां लोगो को मोहित करती है, हवेली की छत गुंबददार है जो मुगल स्थापत्य कला की पहचान है। यदि आप भी जैसलमेर आ रहे है तो इस हवेली पर विजित करना ना भूले।
- घूमने का समय : सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक
- प्रवेश शुल्क (भारतीय) : 20 रु. (अनुमानित)
- प्रवेश शुल्क (विदेश) : 100 रु. (अनुमानित)
पटवा की हवेली (Patwa Haveli)
वैसे तो जैसलमेर में घूमने के लिए कई सारी जगहें है पर पटवा की हवेली उन सभी से भिन्न है, यह हवेली जैसलमेर के किले के बाद सेलानियो की दूसरी पसंद रही है। इस हवेली का निर्माण यहां पर रहने वाले पटवा परिवार के द्वारा 19वीं शताब्दी में किया गया है। कहा जाता है की इस हवेली का निर्माण कार्य करीब पांच दशकों तक चला था।

हवेली की निर्माण में मुख्य रूप से बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है, हवेली के निर्माण में राजपूताना और मुगल स्थापत्य कला का निर्माण किया गया है। यह हवेली तात्कालिक उत्कृष्ट वास्तुशास्त्र और स्थापत्य कला का जीता जागता उदाहरण है। हवेली की दीवारों पर नाजुक नक्काशी और कलाकृतियां उखेरी गई है, जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देती है।
- घूमने का समय : सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक
- प्रवेश शुल्क (भारतीय) : 20 रु.
- प्रवेश शुल्क (विदेशी) : 100 रु.
व्यास छत्री जैसलमेर (Vyas Chhatri Jaisalmer)
जैसलमेर में कई आकर्षित और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जिनमे व्यास छतरी का नाम भी आता है। यह प्राचीन खूबसूरत स्मारक हिंदू महाकाव्य महाभारत के लेखक ऋषि व्यास को श्रद्धांजलि के तौर पर अर्पित है। इस ऐतिहासिक स्मारक का निर्माण 18वीं शादाब्दी के एक राजा के द्वारा बनवाया गया था। इस स्मारक में राजपूताना वास्तुकला का उपयोग किया गया है, इस स्मारक में जटिल नक्काशी की गई है।

इस स्मारक को एक बड़े परिसर में बनाया गया है जिसमे कई मंदिर और अन्य प्राचीन सरचनाएं बनी हुई है। इस छतरी रेगिस्तान का नजारा वाकई मे बहुत सुंदर दिखाई देता है, यहां पर सूर्यास्त का नजारा, एक मनमोहक दृश्य है जिसे आपको जीवन में एक बार अनुभव अवश्य करना चाहिए।
- घूमने का समय : सुबह 8 बजे से शाम 7:30 बजे तक
- प्रवेश शुल्क ; 100 रु.
- कैमरा शुल्क : अतिरिक्त 100 रु.
सैम सेंड ड्यूंस (Sam Sand Dunes)
यदि आप जैसलमेर के टूर पर आए और सैम सेंड ड्यूंस का अनुभव नहीं किया तो आपका जैसलमेर का ट्रिप अधूरा है। सैम सैंड ड्यून्स, जैसलमेर किले से करीब 45KM दूर पर स्थित है, सैम सैंड ड्यूनस के इस अनोखे सफर में आपको कई प्रकार की गतिविधियां करने को मिलेगी। आप यहां पर ऊंट की सवारी, रैपलिंग, सेंडबोर्डिंग, जंगल सवारी और रेगिस्तान एक्सप्लोर करने जैसी अनेक गतिविधियां है जिसका अनुभव आप यहां पर कर सकते है।

सैम सैंड ड्यून्स में आपके ठहरने के लिए टेंट हाउस और झोपड़ियां है, जिनमे आपको सभी बुनियादी सुविधाएं मिल जायेगी। वही खाने पीने के लिए यहां पर बहुत से होटल, रेस्ट्रो इत्यादि मिल जायेंगे जहां पर आपको कई प्रकार के स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजन मिल जायेंगे।
- घूमने का समय : 24 घंटे खुला
- शुल्क : अपनी सुविधा और टेंट कर चुनाव के आधार पर भिन्न।
मंदिर पैलेस जैसलमेर (Temple Palace Jaisalmer)
मंदिर पैलेस जैसलमेर, अपनी जटिल वास्तुकला के लिए पूरे देश भर में प्रसिद्ध है। इस पैलेस में आपको राजपूत और इस्लामी दोनो वास्तुकलाओं के मिश्रण से बनाया गया है, इस पैलेस के अंतर्गत बहुत ही अनोखी और जटिल नक्काशी की गई है। इस पैलेस को खास इसका टॉवर बनाता है जो यहां का सबसे ऊंचा टॉवर माना जाता है, इस टॉवर से जैसलमेर शहर का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है।

मंदिर पैलेस को अभी एक हैरिटेज होटल में बदल दिया गया है। वही पैलेस के कुछ हिस्से को आम लोगो के लिए खोला जाता है, जिसके लिए आपको कुछ प्रवेश शुल्क देना होता है। यहां पर कुछ संग्रहालय भी स्थित है जहा से आप इस पैलेस के इतिहास के बारे में जान सकते है।
- घूमने का समय : सुबह 8 बजे से दोप. 12 बजे
- प्रवेश शुल्क (भारतीय) : अनुमानित कोई शुल्क नहीं
- प्रवेश शुल्क (विदेशी) : 50 रु.
कुलधरा जैसलमेर (Kuldhara Jaisalmer)
जैसलमेर का कुलधरा गांव भी एक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है, सैलानियों के बीच कुलधरा के आकर्षण का मुख्य कारण इसका इतिहास है, कहा जाता है की कुलधरा एक श्रापित जगह है। यहां पर पहले पालीवाल ब्राह्मण रहते थे। लेकिन अब यह एक वीरान और खंडहरों में तब्दील हो चुका पर्यटन स्थल है।

वैसे तो कुलधरा को लेकर कई लोक कथाएं प्रचलित है, लेकिन सबसे प्रसिद्ध मान्यता यह है की जब यहां के सामंत (राजा) को यहां एक एक ब्राह्मण की लड़की पसंद आ जाती है और जब उससे शादी करने का प्रस्ताव रखा तो यहां के सभी ब्राह्मणों के रातों रात इस गांव को छोड़ दिया। यहां पर लोग इस जगह को देखने और इसका इतिहास जानने के लिए आते है।
- घूमने का समय : सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक
- प्रवेश शुल्क (भारतीय) : 10 रु.
- कार के लिए प्रवेश शुल्क : 50 रु.
- प्रवेश शुल्क (विदेशी) : 100 रु.
बड़ा बाग जैसलमेर (Bada Bagh Jaisalmer)
जैसलमेर में यदि आपको कुछ बहुत प्राचीन जगह को देखने की इच्छा है तो आपको एक बार बड़ा बाग जरूर विजिट करना चाहिए। जिसका निर्माण 16 वीं शताब्दी में करवाया गया था। इस बाग को बनाने का मुख्य उद्देश्य राजा महाराजाओं की मृत्यु उपरांत उनकी याद में छतरियां बनाने का स्थान है।

इस बाग में कई राजाओं और महाराजाओं की छतरियां बनी हुई है। इसमें पहली छतरी महाराजा जय सिंह द्वितीय की याद में बनाई गई थी, आज यह जैसलमेर के राजा महाराजाओं के समाधि स्थल या उनकी याद में बनाई गई छतरियों के रूप में प्रसिद्ध है। इस बाग में बनी छतरियां मुख्य रूप से राजस्थानी वास्तुकलां शैली में बनी हुई है जिसमे शानदार नक्काशी की गई है।
- घूमने का समय : सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक
- प्रवेश शुल्क : 100 रु.
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खाबा किला जैसलमेर (Khaba Fort Jaisalmer)
खाबा किले इस निर्माण यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मण द्वारा करीब 14 शताब्दी में करवाया गया था, जहां इन ब्राह्मणों ने करीब 200 वर्षों तक शासन किया आज के समय में यह वीरान पड़ा हुआ है, जो एक हैरिटेज पर्यटन स्थल के तौर पर जाना जाता है।

इस महल के अंदर कई दुकानें, घर, मंदिर इत्यादि हुआ करते थे, लेकिन दुकानें और घर समय के साथ खत्म हो गए लेकिन मंदिर अभी भी जीवंत स्थिति में है। यह किला रेगिस्तान के बीचों बीच स्थित है जो एक चट्टान पर बना हुआ है। किला बलुआ पत्थर से बना हुआ है, जिसमे कई महल, कमरे, बड़े हॉल और आंगन है। यदि आप जैसलमेर आ रहे है तो यह किला आपकी सूची में होना चाहिए।
- घूमने का समय : सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक
- प्रवेश शुल्क (भारतीय) : 50 रु.
- प्रवेश शुल्क (विदेशी) : 100 रु.
“गोल्डन सिटी” जैसलमेर तक कैसे पहुंचे
जैसलमेर तक आप हवाई, रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते है:—
हवाई मार्ग से : पूरे देश से जैसलमेर हवाई अड्डे के लिए रोजाना बहुत सी नेशनल फ्लाइट चलाती है, जिसके माध्यम से आप डायरेक्ट जैसलमेर आ सकते है। लेकिन हवाई अड्डा जैसलमेर के केंद्र से करीब 13 km की दूरी पर है
रेल मार्ग से : यदि आप ट्रेन से जैसलमेर आना चाहते है तो आ सकते है, देश भर से रोजाना कई ट्रेनें सीधे जैसलमेर के लिए चलती है। आप अपने शहर से जैसलमेर के लिए ट्रेन देख सकते है।
सड़क मार्ग से : यदि आप अपनी कार या लोकल बस का सफर करके जैसलमेर आना चाहते है तो यह भी संभव है। आप गूगल मैप पर अपने शहर से जैसलमेर की दूरी और मार्ग दोनो देखकर आसानी से जैसलमेर आ सकते है।
jaisalmer top 10 tourist places पर घूमने में कितना खर्च होगा?
यदि आप ऊपर दिए गए सभी स्थानों को अपनी सूची में रखकर जैसलमेर की ट्रिप पर आते है तो आपको घूमने में करीब 8 से 10 हजार रुपए का खर्चा हो सकता है, इसके अतिरिक्त ट्रेवलिंग का खर्चा अलग रहेगा। यदि आप 4 से 5 दोस्त एक साथ घूमने आते है तो होटल में ठहरने का खर्चा आपस के बट जायेगा, जिससे आपके पैसे की बचत होगी।
इस पूरी ट्रिप में आपको कम से कम 8 हजार रुपया का खर्चा हो सकता है। जैसलमेर का यह ट्रिप आपके लिए यादगार साबित होने वाला है हमारी राय में आप एक बार जैसलमेर जरूर विजिट करें।